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Wednesday, 28 November 2012

Aise Sathan ko chod dena Chahiye


उस देश मे निवास न करे जहा आपकी कोई इजजत नहीं, जहा आप रोजगार नहीं कमा सकते, जहा आपके कोई मित्र नहीं और जहा आप कोई ज्ञान आर्जित नहीं कर सकते।।

वहा एक दिन भी ना रके जहा ये पाच ना हो.
धनवान व्यक्ति ,
विदान व्यक्ति जो शास्त्रों को जानता हो,
राजा,
नदियाँ,
और चिकित्सक .

बुद्धिमान व्यक्ति ऐसे देश कभी ना जाए जहा ...
रोजगार कमाने का कोई माधयम ना हो.
जहा लोग किसी से डरते न हो.
जहा लोगो को किसी बात की लज्जा न हो.
जहा लोगो के पास बुद्धिमत्ता न हो.
जहा के लोगो की वृत्ति दान धरम करने की ना हो. 

Tuesday, 27 November 2012

Chanakya Neeti Gyan Vichar

इन बातो को बार बार गौर करे...
सही समय
सही मित्र
सही ठिकाना
पैसे कमाने के सही साधन
पैसे खर्चा करने के सही तरीके
आपके उर्जा स्रोत.

आत्याधिक सुन्दरता के कारन सीताहरण हुआ,
अत्यंत घमंड के कारन रावन का अंत हुआ,
अत्यधिक दान देने के कारन रजा बाली को बंधन में बंधना पड़ा,
अतः सर्वत्र अति को त्यागना चाहिए.

Sunday, 18 November 2012

Dosti Mitrata Gyan by Chanakya

हर मित्रता के पीछे कुछ स्वार्थ जरूर छिपा होता है। दुनिया में ऐसी कोई दोस्ती नहीं जिसके पीछे लोगों के अपने हित न छिपे हों, यह कटु सत्य है, लेकिन यही सत्य है। और  जो मित्र आपके सामने चिकनी-चुपड़ी बातें करता हो और पीठ पीछे आपके कार्य को बिगाड़ देता हो, उसे त्याग देने में ही भलाई है। चाणक्य कहते हैं कि वह उस बर्तन के समान है, जिसके ऊपर के हिस्से में दूध लगा है परंतु अंदर विष भरा हुआ होता है।

चाणक्य कहते है कि जो व्यक्ति अच्छा मित्र नहीं है उस पर तो विश्वास नहीं करना चाहिए, परंतु इसके साथ ही अच्छे मित्र के संबंद में भी पूरा विश्वास नहीं करना चाहिए, क्योंकि यदि वह नाराज हो गया तो आपके सारे भेद खोल सकता है। अत: सावधानी अत्यंत आवश्यक है।

Tuesday, 30 October 2012

Chanakya Quotes in hindi

अग्निहोत्र बिनु वेद नहिं, यज्ञ क्रिया बिनु दान ।
भाव बिना नहिं सिध्दि है, सबमें भाव प्रधान ॥

Hindi Meaning -->

बिना अग्निहोत्र के वेदपाठ व्यर्थ है और दान के बिना यज्ञादि कर्म व्यर्थ हैं ।
 भाव के बिना सिध्दि नहीं प्राप्त होती इसलिए भाव ही प्रधान है ॥१०॥

English Meaning -->
Chanting of the Vedas without making ritualistic sacrifices to the Supreme Lord through the medium of Agni, and sacrifices not followed by bountiful gifts are futile. Perfection can be achieved only through devotion (to the Supreme Lord) for devotion is the basis of all success.